मेरी शायरी
-प्रदीप कुमार
Tuesday, May 17, 2011
गम-ए-जिंदगी न नाराज हो इस कदर,
मेरे नसीब में आने को तू बेकरार है किस कदर;
माना कि हर जिंदगी में तेरा दखल है बड़ा,
पर मेरी जिंदगी के न करीब आ इस कदर ।
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