हरियाली ही हरियाली दिखती है तुम्हे,
नज़र घुमा के वो बंजर भी देखो,
खुशनुमा चेहरे तो बहुत देखते हो,
जलती अश्कों का वो मंजर भी देखो
नज़र घुमा के वो बंजर भी देखो,
खुशनुमा चेहरे तो बहुत देखते हो,
जलती अश्कों का वो मंजर भी देखो
मेरे पूज्य दादाजी को १७वी पुण्य तिथि में सादर श्रद्धांजलि |