Saturday, September 29, 2012

जिंदगी पे अपने अब एतबार नहीं होता,
आ जाओ कि अब इंतज़ार नहीं होता |
बढ़ा लो कदम उजाले की ऐ "दीप",
कैद कर रख सके अंधेरे में अब वो बात नहीं रही |

Monday, September 10, 2012


रोशनदानों से भी अक्सर झाँकते हैं अँधेरे,
वादियों में भी कहाँ बयार नजर आते हैं;
नकली चेहरा लिए बस घूमते हैं इंसान,
हर तरफ रंगे हुए सियार नजर आते हैं |

Sunday, September 9, 2012

ऐसा नहीं की मेरे इंतज़ार की उसे खबर नहीं,
तड़पाने की अदा तो उनके फितरत मे शुमार है |
जिंदगी उलझनों से भरी है तो क्या ऐ "दीप",
उलझनें ही अक्सर उलझनों को सुलझाने का जज़्बा देती हैं |
बुझे बुझे से लगते हो,
क्या ख्वाब समेटे रखा है,
मंजर तुम्हारी आँखों का,
कहे, आग समेटे रखा है |
भुला कर भी वो हमे भुला न पाये,
कोशिश मे मुझे भुलाने की खुद को ही भूल बैठे |
यादों में किसी के अकसर कट जाती है रात,
सुबह होता है एहसास कि आज तो हम सोये ही नहीं |
तड़प से मेरी गर उन्हें ख़ुशी मिल जाये,
तो ऐ खुदा ता उम्र मैं यूँ ही तड़पता ही रहूँ;
दूर रहकर ही मुझसे उन्हें सुकून आ जाये,
तो दुआ रहेगी बन खुशियाँ बरसता ही रहूँ |
♥पाकर तुझे कोई जीना ही भूल जाए,♥ 
♥जख्मों को अपने सीना ही भूल जाए,♥ 
♥डूबकर तेरी झील सी गहरी आँखों में,♥ 
♥एक मयकश भी शायद पीना ही भूल जाए |♥
♥बना देते हैं पागल मुझे काले ये दो नैन तेरे,♥ 
♥सुर्ख लब तेरे छीन लेते हैं सुकून-ओ-चैन मेरे,♥ 
♥कर देती है मदहोश ये मीठी सी मुस्कुराहट तेरी,♥ 
♥देख कर ही तुझको कट जाते हैं हर रैन मेरे |♥
♥•♥ दो पल के लिए तेरा हो जाने को दिल करता है,♥•♥ 
♥•♥ मदभरी इन आँखों में खो जाने को दिल करता है,♥•♥ 
♥•♥ दिल करता है छू लूँ तेरे इन नाजुक लबों को,♥•♥ 
♥•♥ तेरे आगोश में आके सो जाने को दिल करता है |♥•♥

Friday, August 10, 2012


हर कोई यहाँ मयकश है, हर कोई प्यासा खड़ा है,
कोई शराब में है डूबा,कोई किसीके आँखों में पड़ा है,
दुबे रहना ख्वाबो में बन गई यहाँ फितरत सबकी,
हर मयकश यहाँ स्वयं में एक दूजे से बड़ा है |
आ मेरे आगोश में, हसीं ख्वाब दूँ तुझे,
खो जाऊं तुझमे या बस आदाब दूँ तुझे,
जज्बातों की आँधियों में संग उड़ चलूँ तेरे,
कुछ सवाल मैं करूँ कुछ जवाब दूँ तुझे |
महंगाई बेशक फर्श से अर्श तक पहुंचा,
पर जमीर तो दिन-ब-दिन सस्ता हो रहा |
आने लगी हैं सदायें अब फूलों के चटकने की भी,

कि गुलिश्ताँ भी अब खिलने पे अफसोस कर रहा |

Monday, August 6, 2012


क्या हुआ जो तूने ये लब सिल रखे, आँखों ने तेरी सब बयां कर दिया,
माना प्यार है खामोशयों से तुझे, तेरी धड़कनों ने शोर यहाँ वहाँ कर दिया,
जज़्बातों को छुपाए रखो दिल में, ये एक हसीन अदा है तुम्हारी,
बचते रहे मुझसे अक्सर लेकिन, मेरे इश्क़ ने मशहूर तेरा जहां कर दिया |

Saturday, April 28, 2012


दिल चुराना है चुरालो, पर ये ख्याल रखना,
कीमती है बड़ा और कोमल भी, संभाल रखना ।
बिकते बाजार में हर चीज़ पर प्रेम नहीं,
पर मुझसे वो मिलेगा न मलाल रखना ।

Thursday, April 26, 2012


कभी आवाज दूं दिल से तो अनसुना न करना,
जो बाहें मैं फैलाऊ तो भागी चली आना,
माना कि दस्तूर है दूर से रिश्तें निभाने का भी,
पर दिल से ही सही मेरे पास में ही रहना ।

Thursday, January 19, 2012

बुलन्द हो इरादे तो राह निकलती है पर्वतों से भी,
कि हौसलों के आगे तो सारा जमाना झुकता है |
जोर जमाने में कितना है ये देखना बाकि है,
जो कहते हैं अपने, उन्हे आजमाना बाकि है,
बाकि है "दीप" घने साये से निकलना और निकालना,
रकीबों को असली पहचान दिखाना बाकि है |
कहते हैं वो सिर्फ नेता-पुलिस करप्टेड है,
पर वाईरस करप्शन का हर एक में इन्जेक्टेड है,
किस-किस से बच के चले सोचता है ये "दीप",
इस रोग से यहाँ हर एक शख्स इन्फेक्टेड है ।
ठण्ड पाँव पसार चुका है गहराई में,
दुबक गये हैं सब अपनी-अपनी रजाई में,
चलो चले एक ऐसी दुनिया, कहते हैं जिसे स्वप्न नगर,
खो जाते हैं निंदिया रानी के अंगड़ाई में |
खून में आज उबाल आने दो,
थोड़ा-सा फिर बवाल होने दो |
देखो सूरज की किरणों को,
वो हर आशा का संचार लेकर आती है,
हर अंधेरे का अंत प्रकाश में होता है,
ये हर रोज हमें सिखलाती है |
जा रहा है गत वर्ष, आ रहा है नव वर्ष;
सबका ही हो भला, और सब रहें सहर्ष |
जमाने के हर कदम से कदम मिलाता हूँ,
कभी हँसता हूँ खुद, कभी औरों को हँसाता हूँ ।
आता हुआ वक्त रखुँ सबके लिए यूँ ही हँसता हुआ,
नव वर्ष के पहले दिन यह बीड़ा उठाता हूँ ।
बादल बना है दुश्मन, छुपा रखा है चाँद को,
चाँदनी के इंतजार में कहीं रात न गुजर जाए ।
जानता हूँ दुनिया की हर एक रीत लेकिन,
अनजान बने रहना ही यहाँ बेहतर विकल्प है |
ऐ इंसान !!
सीख लिया गिरगिट की तरह रंग बदलना,
कुत्तों से थोड़ी वफादारी भी सीखी होती;
जिन्दगी निभाने के नाम पे कर चुके सारे ओछे कर्म,
असली वाली थोड़ी दुनियादारी भी सीखी होती |
आँखों पे छाये परदे को हटा के भी देखो,
ये दुनिया भी बेहद हसीन नजर आयेगी;
दिल होगा कुंभलाया, सब होगा बदरंग,
मुस्कान के साथ शमाँ रंगीन नजर आयेगी |
वो कहते हैं कि बड़े शरीफ हैं हम,
दिल में भक्ति के दिए हर वक्त जलते हैं;
जालसाजी भी करते हैं भगवान का नाम लेकर,
चोरी करने को भी दही खा के निकलते हैं |
राम नाम की बेला में,
उठ जा बंदे शौक से;
सेहत चंगी कर थोड़ी,

घुम आ थोड़ा चौक से ।
माना की ज़माना साथ नहीं,
पर कारवां तो शुरू एक से ही होता है;
सच है कि सब स्वार्थी हैं बने,

पर सबका भला तो एक बन्दे नेक से ही होता है |
पलकें झुकाना भी उनका अजीब है,
हर आदा उनका दिल के करीब है;
मनमोहिनी है उनका अंदाज-ए-बयाँ,
पायल का भी उनका अपना नसीब है ।

Wednesday, December 21, 2011

जिंदगी समस्या देगी तो समाधान भी देगी,
दर्द अगर मिलता है  एक दिन वो जायेगा ,
स्वयं बढ़ना होगा पथ में आगे ,
आगे तुझे बढ़ने कोई फ़रिश्ता नहीं आयेगा .

Tuesday, December 20, 2011

जमाने की ठोकरें तो लगती ही हैं,
सफल वही होता है जो बार बार उठ खड़ा होता है ;
जोशिले जोश में आगे बढ़ते ही चलते हैं,
कायर किस्मत सुधरने के इंतजार में पड़ा होता है 
इंशुरेंस वाले भी कमाल हैं,
गजब सितम ढाते हैं,
मरने का उदाहरण देते हैं,
और प्यार से समझाते हैं 
देखा है सूरमाओ को भी सड़क पे आते हुए,
सड़क वालों को भी कारों पे चलते देखा है;
लोग भरोसा करते हैं बहुत अपनी किस्मत पे,
मैने हाथों की लकीरों को भी बदलते देखा है |

आँसुओ की कभी कोई गिनती नहीं होती,
पर मुस्कान तो बस ऊँगलियों में गिने जाते हैं;
गम तो जीवन में होता है बेहिसाब,
पर खुशी के लम्हें तो बहुत कम ही आते हैं |

रोया न जायेगा चाहे सितम पे सितम कर लो,

कि आँसुओ के बहने की अब इंतहा हो चुकी |
दर्द-ए-दिल समझ के भी कोई अनजान बैठा है ,
लूटने वाला यहाँ बनके महान बैठा है ,
लाश है की हिलने का नाम नहीं ले रही ,
 उधर जनाजों के इंतजार में शमशान बैठा है .
हरियाली ही हरियाली दिखती है तुम्हे,
नज़र घुमा के वो बंजर भी देखो,
खुशनुमा चेहरे तो बहुत देखते हो,
जलती अश्कों का वो मंजर भी देखो 
तेरे आने की जब आहट सी हुई ,
मन -मंदिर में एक छटपटाहट सी हुई ,
पलके बिछ गयी आपके आने की राहों में ,
दिल में एक मीठी सी घबराहट सी हुई .
नाराजगी में भी प्यार दिखाना कोई उनसे सीखे,
बंद लबों से भी कुछ कह जाना कोई उनसे सीखे,
हर एक अदा है उनकी करोड़ों में एक,
मदमस्त आँखों से मुस्कुरा देना कोई उनसे सीखे .

परछाई का साथ कभी छुटता नहीं ऐ दीप,

इंसान को एकाकीपन का एहसास नहीं होने देती |
दिल कहता है कि तेरे करीब आ जाऊं ..

फिर अचानक दूरियों का एहसास खुद ही मिट जाता है ..
रोता है आसमान धरती को याद करके,

पर मिलना शायद इनके नसीब में नहीं 

ये सर्द मौसम और ये राजनीतिक गरमाहट,
चुपके से आती आंदोलन की आहट,
कहीं शोर, कहीं शांति, कहीं द्रोह, कहीं क्रांति,
कहीं से आती षड़यंत्र की सुगबुगाहट |

दिल की धड़कनों में जब कोई बस जाता है,

तस्वीर आती है नजर हर तरफ उसकी ही |