Monday, August 15, 2011

कोई क्या छीनेगा, आजादी को रग रग में बसा लेंगे हम,
दुष्मनों का सर काट देंगे या अपना कटा लेंगे हम |

4 comments:

शालिनी कौशिक said...

ऐसा ही जोश रहा तो दुश्मनों की तो खैर नहीं प्रदीप जी.शानदार प्रस्तुति.

Raam said...

बहुत सुन्दर रचना !!!

Dr Varsha Singh said...

Excellent....

शिखा कौशिक said...

वाह !

blog paheli